इस्लामाबाद के दिल हमजा मिलिट्री सेंटर पर अफगानिस्तान का ड्रोन हमला?

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

दुनिया की नज़र अभी मिडिल ईस्ट की जंग पर टिकी है… लेकिन एशिया के एक और कोने में बारूद धीरे-धीरे नहीं, बल्कि तेज़ी से सुलग रहा है.

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पुरानी दुश्मनी अब ड्रोन और एयर स्ट्राइक के दौर में पहुंच चुकी है. और इस बार दावा ऐसा है जिसने इस्लामाबाद तक को हिला देने का संदेश दिया है.

ड्रोन की दस्तक: अफगानिस्तान ने हमजा मिलिट्री सेंटर उड़ाने का किया दावा

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के फैजाबाद इलाके में स्थित ‘हमजा’ नाम के एक स्ट्रैटजिक मिलिट्री सेंटर को निशाना बनाया.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला ड्रोन एयरक्राफ्ट के जरिए किया गया और इसमें कमांड सेंटर समेत कई अहम सैन्य ठिकानों को टारगेट किया गया.

अफगान सरकार का दावा है कि हमले में पाकिस्तानी सेना को भारी जान-माल का नुकसान हुआ. हालांकि पाकिस्तान की तरफ से अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

हमले का दावा और डिजिटल युद्ध

अफगान रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए दी. पोस्ट में कहा गया कि ऑपरेशन के दौरान मिलिट्री सेंटर के अंदर मौजूद कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैनिकों के क्वार्टर को निशाना बनाया गया.

विश्लेषकों का कहना है कि आज के युद्ध में सिर्फ बम ही नहीं गिरते…सूचना भी हथियार बन चुकी है.

कई बार असली युद्ध से पहले नैरेटिव का युद्ध शुरू हो जाता है.

डुरंड लाइन: पुराना जख्म, नई आग

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डुरंड लाइन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है.

लेकिन हाल के दिनों में हालात खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मोर्टार, एयर स्ट्राइक और ड्रोन हमलों के आरोप लगाए हैं.

बीते दिन पाकिस्तान ने काबुल, पक्तिया और कंधार के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए थे. पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया था और दावा किया था कि उसका निशाना आतंकी ठिकाने थे.

नागरिकों पर हमले का आरोप

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हमले रिहायशी इलाकों में हुए. इन हमलों में चार लोगों की मौत और एक दर्जन से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर सामने आई.

संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में हुए हमलों में आम नागरिकों को भी नुकसान पहुंचा.

यानी युद्ध का सबसे पुराना सच फिर सामने आया है. गोली सैनिक चलाते हैं, लेकिन दर्द अक्सर नागरिक झेलते हैं.

रक्षा विशेषज्ञ अजीत उज्जैनकर क्या कहते हैं

रक्षा विशेषज्ञ अजीत उज्जैनकर का मानना है कि यह टकराव सिर्फ सीमा विवाद नहीं है.

उनके अनुसार:

“पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह संघर्ष अब सीमित झड़प नहीं रहा. ड्रोन और एयर स्ट्राइक का इस्तेमाल बताता है कि दोनों देश एक तरह के ‘लो-इंटेंसिटी वॉर’ में प्रवेश कर चुके हैं.”

वे कहते हैं कि अगर यह तनाव जारी रहा तो पूरा दक्षिण एशिया सुरक्षा अस्थिरता का सामना कर सकता है.

दक्षिण एशिया की राजनीति का अजीब गणित है. यहां नेता भाषण में शांति की बात करते हैं… और सीमा पर सैनिकों को गोली चलाने भेज देते हैं. कागज पर शांति वार्ता चलती रहती है और जमीन पर ड्रोन उड़ते रहते हैं.

यही वजह है कि इस क्षेत्र में युद्ध कभी आधिकारिक रूप से शुरू नहीं होता… लेकिन खत्म भी नहीं होता.

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